BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

गर्मी के आते ही बाजारे में जामनी के रंग के जामुन नजर आने लगते है। लेकिन क्या आपको पता है यह जामनी रंग, स्वाद में खट्ट-मीठा जामुन कितना गुण कारी है जामुन स्वाद में तो कसैला लेकिन इसमें रोगों से लडने की गणु भर पूर होते हैं। जामुन वातकारक, पित्तशामक और उल्टी को रोक के काम आता है। डायबिटीज के लिए इसकी गुठली का उपयोग व और भी अन्य रोगों से बचाने के लिए किया जाता है। जामुन का सिरका भी बना सकती है यह पाचक होता है। जामुन की गुठली को सुुखाकर उसका पाउडर बनाकर रख लें। नियमित रूप से आधा चम्मच की मात्रा में सुबह से शाम पानी के साथ इसका सेवन करें। जामुन की छाल को सुखाकर उसे जलाएं और राख बनाकर छान लें। फिर इसे बोतल में भरकर रख लें। इसके सेवन सुबह शाम 60-65 मि ग्राम की मात्रा में खाली पेट पानी के साथ इसक सेवने करने से डायबिटीज नियंत्रित रहता है। जामुन की छाल को छाया में सुखाकर बारीक पीसकर कपडे से छान लें। इसका प्रयोग मंजन के रूप में रके। इससे दांत मजबूत होते हैं, साथ ही पायरिया और दांत दर्द से भी छुटकारा मिलती है। जामुन औरआम की गुठलियों का 2-2 ग्राम पाउडर छाछ के साथ दिनमें तीन बार लेने से पेटदर्द दूर होता है। पथरी के रोगी को जामुन की गुठली का पाउडर दही के साथ सुबह-शाम कम से कम दिन में 3 ग्राम की मात्रा में लें। इससे पथरी गलकर धीरे-धीरे निकल जाती है। इसके साथ ही पका जामुन खाने से भी पथरी के मरीज को आराम भी मिलता है। ठंडे पानी में जामुन को कम से कम 2 घंटे तक भिगोकर रखें। फिर उनकी गुठलियां निकालकर उन्हें हाथ से अच्छी तरह मसलकर कपडे से निचोड-छानकर रस निकाल कर रख लें। यह रस पेटदर्द, हृदय शूल, यूरिन में जलन आदि रोगों में अत्यंत लाभदायक है।   साभार-khaskhabar.com          

Read More

गर्मियों में पुदीना किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होता है। स्वाद, सेहत और सौंन्दर्य का ऐसा संगम बहुत ही कम पौधों में देखने को मिलता है। पुदीना एक आयुर्वेदक औषधि भी है। पुदीना हरे रंग का एक छोटा सा पौधा होता है, जिसमें विटामिन ए, सी, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन, मैग्रीनिशयम, कॉपर और पौटेशियम पाया जाता है इसलिए यह हमारी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। अगर आपके चेहरे पर पिंपल है तो पुदीने की कुछ पत्तियों को लेकर पेस्ट बना लें। फिर उसमें 2-3 बूंदे नींबू का रस मिलाकर इसे चेहरे पर कुछ देर के लिए लगाएं। साफ पानी से चेहरा धो लें। कुछ ही दिनों में पिंपल से राहत मिल जाएगी। पुदीने की कुछ पत्तियों को पानी में पीसकर सोने से पहले रोज रात में लगाएं। झाइयों से मुक्ति मिलेगी। मक्खन में कुछ मात्रा पिसी हल्दी मिलाकर पैरों में लगाएं, इससे पैरों के दाग-धब्बे दूर होते हैं। कच्ची गाजर, टमाटर खाएं। इनमें मौजूद विटामिनों से स्किन में निखार आता है। पुदीने की चाय या पुदीने का अर्क यकृत के लिए अच्छा होता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में बहुत ही उपयोगी है। हाई बीपी से रोगी को पुदीने का सेवन करना चाहिए। जब कि लो बीपी के पीडित की पुदीने की चटनी का सेवन करना चाहिए। साभार-khaskhabar.com  

Read More

पानी शरीर को स्वास्थ्य और फिट रखता है, जल पूरी बॉडी को चंगा और ऊर्जावान बनता है यह एक प्राकृमिक पदार्थ है। हमारी जिंदगी पानी पर ही निर्भर है। जिस तरह एक कार को गैस, पेट्रोल या डीजल की जरूरत होती है, वैसे ही हमें पानी की जरूरत होती है। हमारे शरीर के सभी सेल्स और ऑर्गन्स को अपना कामकाज तरीके से करने के लिए पानी की जरूरत है। किसी भी बीमारी में पानी रामबाण की तरह काम करता है। पानी का प्रयोग कई तरीकों से प्राकृतिक उपचार के रूप में होता है। पानी निर्जलीकरण के कारण होने वाले सरदर्द और पीठदर्द से राहत दिलाता है और हमारे शरीर को तरोताजा रखता है। स्वस्थ रहना है तो कुदरत के इस तोहफे का आनंद उठायें।   गर्मी में शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहे, इस का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए गर्मी के महीनों में खूब पानी पीएं। शरीर में नमी बहुत जरूरी है इंसानी शरीर के लिए सबसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स में से है पानी। आमतौर पर शरीर का 60 से 75 फीसदी हिस्सा पानी होता है। पानी शरीर के तापमान को काबू में रखता है, जरूरी ऑर्गन्स की हिफाजत करता है, पाचन में मदद करता है, ऑक्सिजन और पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाता है। गैरजरूरी और जहरीले तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है। पानी की कमी से डीहाइडे्रशन, कब्ज, बेहोशी और तमाम दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। कितना पानी पीना चाहिए एक इंसान को रोजाना औसतन 8 से 12 गिलास पानी की जरूरत होती है। अगर आप नियमित रूप से एक्सर्साइज करते हैं तो आपको शरीर की नमी बनाए रखना मुश्किल होता है इसलिए एक्सर्साइज से पहले, एक्सर्साइज के दौरान और बाद में पानी पिएं। एक्सर्साइज कितना पानी पिएं एक्सर्साइज से 1 घंटा पहले 1 गिलास पानी पिएं। एक्सर्साइज के दौरान हर 15 से 30 मिनट में आधा गिलास और एक्सर्साइज के बाद दो गिलास पानी पिएं। आपको एक्सर्साइज से पहले, एक्सर्साइज के दौरान और उसके बाद पानी की जरूरत होती है। एक्सर्साइज करने वाले शख्स के लिए पानी सबसे ज्यादा पोषक तत्व है। एक्सर्साइज के दौरान पानी या दूसरी तरल चीजों की कमी खासकर गर्मी के मौसम में, अकडन, सिरदर्द, नमी की कमी की वजह बन सकती है। साथ ही एक्सर्साइज करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। एक्सर्साइज के दौरान थोडा-थोडा पानी पीने से एक्सर्साइज के वक्त पसीने के जरिए निकलने वाले जरूरी तत्वों की कमी पूरी हो जाती है।साभार-khaskhabar.com    

Read More

पनीर एक ऐसी चीज है जिसे नमकीन और मीठे तरीकों से खाया जाता है। स्नैक से लेकर डेजर्ट और रात के खाने में पनीर की सब्जी का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकतर लोग इसे स्वाद के लिए इस्तेमाल करते हैं पर आपको यह जानकर हैरानी हो कि पनीर खाने के अनेक लाभ भी हैं। पनीर में विटामिन, कैश्यिम, प्रोटीन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पायी जाती है। पनीर खाने से रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल के स्तर को संतुलित करता है। इसमें बहुत सारे उपयोगी खनिज की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो शरीर के विभिन्न जरूरतों को पूरा करता है। पनीर में ज्यादा मात्रा में प्रोटीन होने की वजह से यह शरीर का वजन कम करने से सहायक होता है।   साभार-khaskhabar.com  

Read More

आयुर्वेद के ग्रंथों में इसके गुणों की व्यापाक रूप से चर्चा की गई है और इसके सेवन को अत्यधिक फायदेमंद और बलदायक बताया गया है। अनानास एक रसदार फल है इसकी फांकें बहुत ही रसीली होती हैं, इसका मुरब्बे के तौर पर सेवन करें तो गर्मी के दिनों में पित्त की शिकायत नहीं होगी। अनानास कृमिनाशक है। अनानास के रस में प्रोटीन युक्त पदार्थो को पचाने की क्षमता होती है जो एसिडिटी में फायदा करती है। इसलिए एसिडिटी होने पर इसका सेवन करना चाहिए। अनन्नास मधुर, तृप्तिकारक व स्फूर्तिदायक फल है। इसमें कैल्शियम, फाइबर, मैग्रीनशियम और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पीलिया, उच्च रक्तचाप, यकृत दोष आदि रोगों में लाभकारी होता है। इसमें ब्रोमेलिन नामक एंजाइम भी पाया जाता है, जो प्रोटीन को पचाने, ब्रोंकाइटिस, एब्सेस न्यूमोनिया, गुर्दे का संक्रमण आदि में कार्य करता है। इससे शरीर की प्रतिरेाधक क्षमता भी बढती है। इससे गले को ठंडक मिलती है साथ ही गले के रोगों से बचाव होता है। यदि पेट में अजीर्ण हो तो पके अनन्नास के छोटे-छोटे टुकडे करके सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण लगाकर खाने से लाभ मिलता है। इस प्रकार अनन्नास ग्रहण करने से पेट के कृमि हफ्ते भर में निकल जाते हैं। जिन बच्चों को पेट में अक्सर कृमि हो जाते हैं, उन्हें उक्त प्रकार से अनन्नास अवश्य दें। अनन्नास में रक्त के हर दोष को दूर करने की क्षमता है, इसीलिए इसका सेवन करने व लेप लगाने से त्वचा में निखार आता है। अस्थमा के रोगियों को सुबह-दोपहर खाली पेट अनन्नास का रस लेने से फायदा होता है। अनियमित माहवारी हो, तो इसके रस का नियमित सेवन करेने से माहवारी सामान्य हो जाती है। शोधों के मुताबिक दिन में 3 बार अनन्नास खाने से बढती उम्र के साथ कम होती आंखों की रोशनी का खतरा कम हो जाता है। साभार-khaskhabar.com          

Read More

मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते हमारी खाने पीने की आदत काफी बदल गई है। हम पौष्टिक चीजें खाने की बजाय स्वाद को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं, जैसे- जंक फूड्स, तली भुनी चीजें, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, आइस्क्रीम आदि। खानपान में गडबडी के चलते शरीर में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या हो गई है,जो आगे चलकर स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। शरीर के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए हर उम्र मेें कैल्शियम की आवश्यकता होती है। बढते बच्चों के शरीर, दांतों के आकार और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी कैल्शियम जरूरी है।   क्यों जरूरी है कैल्शियम? बॉडी की प्रत्येक कोशिश को कैल्शियम की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि हमारी बॉडी में स्किन, नाखून, बाल और मल के जरिए रोज ही कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है। इसलिए कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है। इसलिए कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने के लिए इसकी रोज ही पूर्ति कर ली जाए, तो अच्छा रहता है। यदि ऐसा नहीं होगा, तो हमारा शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा। नतीजा बाहर से भले ही हम कमजोर ना लगें, लेकिन अन्दर ही अन्दर हड्डियाँ खोखली हो जाएंगी और शरीर कमजोर और कमजोर हड्डियाँ कई तरह की पेरशानियाँ पैदा करती हैं, जैसे- जरा-सी चोट लगने पर ही फ्रैक्चर हो सकता है। यही नहीं, कैल्शियम हृदय, मांसपेशियों, ब्लड क्लॉटिंग के लिए भी बेहद जरूरी होता है।इसके अलावा कैल्शियम मांसपेशियों के कई काम में मदद करता है। जैसे- कैल्शियम नर्वस सिस्टम के संदेश मस्तिष्क तक पहुंचाने में सहायक है, जैसे- यदि आपने किसाी गरम वस्तु को छू लिया है, तो मस्तिष्क तुरंत एक संदेश भेजेगा, जिससे आपके मुंह से आह!... आउच! की आवाज आएगी और आप अपने हाथ का जल्दी से दूर हटा लेंगे। इसके अलावा ये चोट, घाव, खरोंच आदि के भी जल्दी ठीक होने में मदद करता है। लेकिन यदि शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाए, तो इसके दुष्प्रभाव होते हैं, जो हमें बीमार कर सकते हैं। इन बीमारियों के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। कैल्शियम की कमी के लक्षण-: दांतों का समय से पहले गिरना  शरीर का विकास रूकना हड्डियों में टेढापन  शरीर के विभिन्न अंगों में ऐंडन या कंपन जोडों का दर्द मांसपेशियों में निष्क्रियता  भ्रूण के विकास पर प्रभाव पडना हाथ-पैरों में झुनझुनाहट व कमजोरी  जरा सा टकराने पर हड्डियों का टूटना कैल्शियम हमें कि चीजों से मिल सकता है, जिन्हें अपने डायट में शामिल कर हम स्वस्थ रह सकते हैं- अनाज-गेंहू, बाजरा, मोठ चना, राजमा, और सोयाबीन।   सब्जियाँ- गाजर, भिंडी, अरबी, मूली, मेथी, करेला और चुकंदर। फल- नारियल, आम, संतरा, और अनन्नास।   डेयरी उत्पाद- दूध व दूध से बनी चीजों को कैल्शियम का प्रमुख स्त्रोत माना जाता है। हर रोज दूध का सेवन शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनाए रखने में मददगार होता है।   मां का दूध नवजात शिश के लिए कैल्शियम का सर्वोत्तम स्त्रोत है, जो उनमें कैल्शियम की पूर्ति करता है और स्वस्थ रखता है। साभार-khaskhabar.com        

Read More

गर्मियों के सीजन में बाजार और हर घर में कैरी होती ही है। यह केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढाता बल्कि इसमें कई औषध गुण भी मौजूद हैं तो कई सुंदर साधन भी है। बॉलीवुड फिल्मों अभिनेत्री को गर्भवती के रूप में दिखाया जाता है कैरी खूब लोकप्रिय कर दिया है।गर्मियों में पसीना तो बहुत आता ही है साथ ही पसीने में दुर्गंध भी तेज आती है तो कैरी के टुकडे पर नमक छिडक कर खाने से पसीने की दुर्गंध कम होती है। कैरी में विटामिन सी उचित मात्रा में होती है जिससे यह तेज व लू से बचाता है। कब्ज दस्त, अपच आदि रोगों से बचाव भी करता है। कच्चे में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है साथ ही यह हृयद रोग और कैंसर से शरीर की रक्षा भी करता है। आयुर्वेद के अनुसार कच्चे आम के सेवन से शरीर में ठंडक बनी रहती है।साभार-khaskhabar.com      

Read More

कुछ कटहल की नाम सुनते ही अजीब-अजीब से मुंह बनाने लगते हैं। जब कि कटहल के अंदर कई पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जैसे, विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन, नियासिन, जिंक, थाइमिन, पोटैशियम और राइबोफ्लेविन आदि। कटहल की सब्जी, अचार और पकौडे कई लोगों का फेवरेट होता है। यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है। इसका सेवन करने से सेहत को तो कई लाभ होते ही है साथ में यह आपकी खूबसूरती को भी निखार देता है। कटहल का स्वास्थ्य लाभ आंखों तथा त्वचा पर भी देखने को मिलता है। इस फल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रौशनी बढती है और स्किन अच्छी होती है। यह रतौंधी को भी ठीक करता है।कटहल के बीज डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक करते हैं। यह आपके पाचन तंत्र को डिटॉक्सीफाई करता है और विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालता है। जब आपको पेट साफ रहेगा तो आपका चेहरा भी निखरे व खिलेगा।कटहल में विटामिन ए और सी पाया जाता है जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन से बचाता है।कटहल में पोटैशियम पाया जाता है जो कि हार्ट की परेशान को दूर करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को लो कर देता है।कटहल में खूब सारा फाइबर पाया जाता है साथ इसमें बिल्कुल भी कैलोरी नहीं होती है। क्या आपको जानकारी है कि पके हुए कटहल के गुदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाला जाए और इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से शरीर में जबरदस्त स्फूर्ती आती है, यह हार्ट के रोगियों के लिये भी अच्छा माना जाता है।साभार-khaskhabar.com    

Read More

अक्सर हम सभी शादी, पार्टी या किसी रेस्टोरेंट पर खाना खाने जाते ही हैं लेकिन खाना चाहे कितना भी अच्छा क्यूं ना बना हो ‘सौंफ’ खाने का अपना ही एक मजा है। शायद ही कोई व्यक्ति हो जो सौंफ से परिचित न हो। सौंफ को मसलों की रानी और पान की जान भी कहा जाता है। सौंफ के दानों का सेवन कर हम अपने मुंह को फ्रेश करते हैँ। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। लेकिन क्या आप इस बात को जानती हैं कि सौंफ की चाय भी बनती है जो कि कई रोगों से निजात दिलाने में मदद करती है। आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में जो कि सौंफ की चाय का सेवन करके दूर की जा सकती हैं। सौंफ के छोटे-छोटे दाने हरे होते हैं। आम तौर पर सौंफ छोटी और बडी दो प्राकर की होती है। दोनों ही खुशबूदार होती है। सौंफ का उपयोग अचारों और सब्जियों में को रूचिकर जायेकदार बनाने के अतिरिक्त औषधि के रूप में भी बहुत अधिक होता है। आयुर्वेद के अनुसार सौंफ त्रिदोष नाशक है। सौंफ की चाय का सेवन करके आप जॉन्डिस के खतरे को कम कर सकती है, इसी के साथ यह किडनी के कार्य को तेज करके हमारे खून को साफ करती है। रातभर ठीक से ना सोने से हमारी आंखों में सूजन हो जाती है, इसके लिए आप सौंफ की चाय बनाए और फिर रूई इसमें डुबोकर अपनी आंखों को 10 मिनट के लिए सेंके। इस चाय का सेवन करके आप आसानी से अपने जोडो में होने वाले दर्द से राहत पा सकती हैं, इससे आपको जल्द ही आराम मिलता है।साभार-khaskhabar.com      

Read More

अंगूर एक बलवर्धक एवं सौन्दर्यवर्धक फ ल है। अंगूर फल मां के दूध के समान पोषक है। फलों में अंगूर सर्वोत्तम माना जाता है। यह निर्बल-सबल, स्वस्थ-अस्वस्थ आदि सभी के लिए समान उपयोगी होता है। बहुत से ऐसे रोग हैं जिसमें रोगी को कोई पदार्थ नहीं दिया जाता है। उसमें भी अंगूर फल दिया जा सकता है। पका हुआ अंगूर तासीर में ठंडा, मीठा और दस्तावर होता है। यह स्पर को शुद्ध बनाता है तथा आंखों के लिए हितकर होता है। अंगूर वीर्यवर्धक, रक्त साफ  करने वाला, रक्त बढाने वाला तथा तरावट देने वाला फ ल है। अंगूर में जल, शर्करा, सोडियम, पोटेशियम, साइट्रिक एसिड, फ्लोराइड, पोटेशियम सल्फेट, मैग्नेशियम और लौह तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। अंगूर ह्वदय की दुर्बलता को दूर करने के लिए बहुत गुणकारी है । ह्वदय रोगी को नियमित अंगूर खाने चाहिएं। हार्ट-अटैक से बचने के लिए बैंगनी (काले) अंगूर का रस ‘एसप्रिन’ की गोली के समान कारगर है। ‘एसप्रिन’ खून के थक्के नहीं बनने देती है। बैंगनी (काले) अंगूर के रस में  ‘फलोवोनाइड्स’ नामक तत्व होता है और यह भी यही कार्य करता है। पोटेशियम की कमी से बाल बहुत टूटते हैं। दांत हिलने लगते हैं, त्वचा ढीली व निस्तेज हो जाती है, जोडों में दर्द व जकडन होने लगती है। इन सभी रोगों को अंगूर दूर रखता है। अंगूर के पत्तों का रस पानी में उबालकर काले नमक मिलाकर पीने से गुर्दों के दर्द में भी बहुत लाभ होता है। गठिया रोग में अंगूर का सेवन करना चाहिए। इसका सेवन बहुत लाभप्रद है क्योंकि यह शरीर में से उन तत्वों को बाहर निकालता है जिसके कारण गठिया होता है। पेट की गर्मी शांत करने के लिए 20-25 अंगूर रात को पानी में भिगों दे तथा सुबह मसल कर निचोडें तथा इस रस में थोडी शक्कर मिलाकर पीना चाहिए। साभार-khaskhabar.com  

Read More

गन्ने का जूस गर्मियों के मौसम में सबसे अच्छा पेय माना जाता है। गन्ने का रस बुखार के रोगियों के लिए अत्यंत हितकारी है। एक शोध के अनुसार, गन्ने के रस का सेवन से रोगों को लाभ मिलता है। इसे पीने से कई प्रकार की बीमारियों जैसे, एनीमिया, हिचकी, जौण्डिस आदि बीमारियां ठीक हो जाती हैं।  गन्ने के रस में ज्यादा बर्फ मिलाकर नहीं पीना चाहिए, सिर्फ रस पीना ज्यादा लाभकारी है। ऐसे ही गन्ने के कई फायदे हैं जिनके बारें में आज हम आपको अच्छी तरह से बताने वाले हैं। गन्ने को जूस नियमित सेवन करने से लीवर में किसी भी प्रकार का इंफेक्शन नहीं होता। यदि इंफेक्शन होता भी है तो इसमें कमी आती है। गन्ने का जूस लीवर को रक्षा करता है।  गन्ने के रस में पोषक तत्वों का फायदा तभी मिलेगा जब साफ व स्वस्छ जूस हो और ताजा हो, जिससे यह ऑक्सीडाइज न हो सके। गन्ने का रस पीने से स्किन को अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड मिलता है जो कीलमुंहासे दूर करने लाभकारी होता है। गन्ने का रस गर्मियों में सेवन करने डी-हाइड्रेशन से बचा जा सकता है। साभार-khaskhabar.com      

Read More

तरबूज में नब्बे फीसदी पानी होता है, इसलिए गर्मी का मुकाबला करने के लिए इससे अच्छा कोई फल नहीं । शायद यही कारण है कि इसका जन्म अफ्रीका के गर्म ईाके में हुआ। तरबूज पर काफी वैज्ञानिक अनुसंधान भी हुए हैं। गर्मी के झुलसते मौसम में तरबूज की तरावट शरीर और मन दोनों को प्रसन्न कर देती है। इसके फलों का भार लगभग डेढ-दो किलोग्राम तक होता है। फलों के हल्के-पीले-हरे छिलके पर गाढी हरी धानियां होती हैं। इसका छिलका पतला है, इसलिए अंदर के लाल गूदे का मात्रा ज्यादा होती है। मध्यम आकार और भार वाले फलों की एक जापानी किस्म असाही योमामोतो भी भारत लाई गई है। इसे भारत में उगाने के नतीजे उत्साहजनक नहीं हैं। वैस इसका गूदा और सुर्ख लाल रंग का है। तरबूज में विटामिन ए, बी, सी तथा लौहा भी प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिससे रक्त सुर्ख व शुद्ध होता है। तरबूज के सेवन से लू और गर्मी की खुश्की से शरीर की रक्षा होती है। देश के रेतीले रेगिस्तानी इलाके और नदियों के किनारों पर गर्मी के मौसम में तरबूज की फसल पटे दिखाई देती है, फिर भी तरबूज उगाने वाले प्रमुख देशों में भारत का नाम नहीं है। पीलिया के रोगियों को तरबूज बहुत फायदा पहुंचाता है, क्योंकि यह शरीर में खून बढाता है और खून को साफ भी करता है। जिस वजह से यह चमडी के रोगियों में तरबूज का सेवन करनेसे लाभ होता है। तरबूज कफनाशक भी है, कहा जाता है कि तरबूज का नियमित सेवन उच्च रक्त-चाप को बढने से रोकता है। साभार-khaskhabar.com          

Read More

नारद संवाद

पाकिस्तान में भी है प्राचीन राम मंदिर, सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल   

Read More

हमारी बात

होली के रंग और इसके पीछे की कहानियां  

Read More

Bollywood


विविधा

दिल्ली में फ्लाईओवर के नीचे चल रहा 'यमुना खादर पाठशाला'

Read More

शंखनाद

विदेश में तेजी से बढ़ी शहद की मांग, जानें मीठी क्रांति के लिए दिए गए आत्मनिर्भर भारत पैकेज से कैसे हुआ कमाल  

Read More