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राजस्थान में मनरेगा के तहत श्रमिक नियोजन हुआ 22 लाख से अधिक || पीएम गरीब कल्याण पैकेज से हिमाचल को लगभग 244 करोड़ रुपए ट्रांसफ़र - अनुराग ठाकुर || MATHURA : सीमा में ई-पास से वाहनों के प्रवेश

चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के कार्यालय खोलने का निर्णय लिया है ताकि लॉकडाऊन के कारण दो महीने से बंद पड़े प्रशासनिक कार्यों को निपटाया जा सके। एक सरकारी प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, स्कूल मुखिया/प्रभारी एवं डीआईईटी, बीआईईटी, जीईटीटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी स्कूलों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों के कार्यालय समयानुसार ही खोले जाएं। उन्होंने बताया कि स्कूल मुखियाओं को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, हरियाणा द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सोशल-डिस्टेंसिंग बनाने, मास्क लगाने, सैनेटाइजर आदि का प्रयोग कर स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा सभी स्कूलों को साबुन, सैनेटाइजर, फेस मास्क, हैंडवाश, टॉयलेट क्लीनर आदि खरीदने के लिए 2500 रूपए से लेकर 4000 रूपए तक की एकमुश्त राशि भी दी जा रही है। प्रवक्ता के अनुसार अगर स्कूल मुखिया को मिड-डे मिल व पाठ्य-पुस्तकों के वितरण या स्कूल के किसी अन्य कार्य के लिए सहयोग की आवश्यकता है तो किसी प्रभारी अध्यापक को बुला सकता है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, क्रोनिक रोग से ग्रस्त स्टॉफ के सदस्यों को अभी स्कूल आने से छूट दी गई है। स्कूल के कार्यालयों, अनिवार्य फर्नीचर व कक्षों को सैनेटाइजर करना जरूरी है। उन्होंने आगे जानकारी दी कि नए शैक्षणिक वर्ष के लिए सभी सरकारी स्कूलों में एक सप्ताह के अंदर स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों की प्रथम बैठक का आयोजन कर दाखिला अभियान, शत-प्रतिशत नामांकन, अवस्थांतर तथा ड्रापआऊट रेट को शून्य करने की योजना करने के निर्देश दिए हैं। साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज की अध्यक्षता में यहां मंत्रिमंडल की उप-समिति की कृषि तथा आयुर्वेद विभागों के साथ एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विकासात्मक मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि शिमला, धर्मशाला, मण्डी और हमीरपुर में वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र की स्थापना की जाएगी, जिसमें असिस्टिड लिविंग, कुशल नर्सिंग देखभाल और आयुर्वेदिक केंद्र की सुविधा होगी। यहां एक कौशल हस्तांतरण केंद्र भी होगा, जहां वरिष्ठ नागरिक युवाओं को कौशल प्रदान करेंगे। जिला आयुर्वेद, चम्बा में होम्योपैथी, नेचुरोपैथी एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना भी की जाएगी तथा योग को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। स्वास्थ्य रिजाॅर्ट, योग, पंचकर्मा एवं आयुर्वेद केंद्रों के विकास द्वारा चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। उप-समिति के सदस्य एवं उद्योग मन्त्री बिक्रम सिंह ने कहा कि किसानों व बागवानों के कल्याण और उन्नति के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आय को दोगुना किया जाए तथा उनके उत्पादों को बेहतर विपणन रणनीति के अनुसार बाजारों तक पहुंचाया जा सके। उप-समिति द्वारा कृषि भूमि के मुआवजे के भुगतान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में किसानों को लाना, मार्केटिंग बोर्ड व मार्केट समितियों की कार्य प्रणालियों में सुधार लाना, ई-मार्केटिंग प्रणाली को प्रभावशाली बनाना, महिला किसानों के लिए ‘जननी प्रोग्राम’ के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा देश एवं विदेश के बड़े कृषि विश्वविद्यालयों के साथ फैलोशिप एवं इंटर्नशिप कार्यक्रमों की शुरूआत करने जैसे विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार कर उचित कदम उठाएगी। उप-समिति के सदस्य एवं वन मन्त्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में 19 मंडियों को ई-नाम प्रणाली के अंतर्गत लाया गया है, जिसमें प्रदेश में 59 उत्पादों का व्यापार किया जा रहा है, जिनमें मुख्यतः फल व सब्जियां शामिल हैं। अब तक 119554 किसान व 1947 व्यापारी ई-नाम द्वारा कृषि उपज का क्रय-विक्रय कर रहे हैं। मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत वर्ष 2019-20 के लिए अब तक 18.18 करोड़ रुपये की धनराशि लाभार्थियों के लिए सहायता के रूप में खर्च की गई। इस अवसर पर मंत्रिमंडल की उप-समिति के सदस्य सचिव एवं सचिव सामान्य प्रशासन देवेश कुमार तथा कृषि और आयुर्वेद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पुलिस विभाग को शराब की हर तरह की तस्करी, नाजायज़ शराब बनाने और बेचने वालों के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही करने के आदेश दिए, जिससे ऐसी गतिविधियों से राज्य को राजस्व के नुकसान से बचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने ऐसे सब-डिविजऩ के डी.एस.पी. और एस.एच.ओज़ के विरुद्ध तुरंत कार्यवाही करने के निर्देश दिए, जिनके इलाकों में ऐसी गतिविधियां सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि नाजायज़ शराब बनाने / तस्करी करने / बेचने आदि से सम्बन्धित किसी भी तरीके की ग़ैर-कानूनी गतिविधि का समर्थन करने या लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों / कर्मचारियों के विरुद्ध भी सख़्त कार्यवाही के आदेश दिए। मुख्यमंत्री के आदेशों पर डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को 23 मई तक जि़ला और पुलिस थानों के स्तर पर शराब के तस्करों / सप्लाई करने वालों / नाजायज़ शराब बनाने वालों की पहचान करने के लिए ज़रूरी हिदायतें जारी की हैं। अधिकारियों को ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन और महामारी अधिनियम से सम्बन्धित धाराओं समेत कानूनी कार्यवाही करने के लिए कहा। डी.जी.पी. ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोविड के फैलाव को रोकने के लिए कफ्र्य़ू / लॉकडाउन के कारण विश्व और भारत में आर्थिक और वित्तीय दबाव के कारण राज्य सरकार को हर संभव राजस्व जुटाने की ज़रूरत है। इस कारण सरकार राज्य से बाहर से शराब की तस्करी करने या नाजायज़ शराब बनाने की सूरत में राजस्व का कमी सहन नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री के निर्देशों की पैरवी के तौर पर पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को सभी थानों ख़ासकर सरहदों के नज़दीकी क्षेत्रों के थानों के प्रमुखों (एस.एच.ओज़) को हर समय चौकस रहने और पंजाब के अंदर शराब की तस्करी को रोकने को यकीनी बनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। पंजाब पुलिस प्रमुख द्वारा चेतावनी दी गई है कि इस उद्देश्य में असफल होने की सूरत में सम्बन्धित थाना प्रमुख का अन्य जगह तबादला किया जाएगा और कसूरवार मानते हुए उसके खि़लाफ़ अपेक्षित विभागीय कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी अधिकारी / कर्मचारी शराब आदि की तस्करी / नाजायज़ शराब बनाने और सप्लाई करने की ग़ैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करता पाया गया तो उसके खि़लाफ़ मुख्यमंत्री के आदेशों के अनुसार सख़्त कार्यवाही होगी। राज्य के पुलिस प्रमुख ने कहा कि पुलिस कमिशनरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को सब-डिवीजऩों के उप -पुलिस कप्तानों (डी.एस.पीज़) और थाना प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्ऱेंस करके उनको यह स्पष्ट करने के लिए निर्देश दिए हैं कि यदि उनके अधिकार क्षेत्र में शराब की कोई भी ग़ैर-कानूनी फैक्ट्री चलती पाई गई, जैसे कि हाल ही में खन्ना और राजपुरा में हुआ, तो सम्बन्धित अधिकारी का अन्य क्षेत्र में तबादला करके उसके खि़लाफ़ कानूनी / विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा ऐसा अधिकारी भविष्य में एस.एच.ओ बनने और सार्वजनिक डिलिंग की नियुक्ति के लिए अयोग्य होगा। डी.जी.पी ने बताया कि सभी पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को कहा गया है कि वह अंतरराज्यीय तस्करी को मुकम्मल रूप में रोकने के लिए रोज़ाना हर स्तर पर निगरानी करें। इसके अलावा सभी पुलिस कमिश्नर और आई.जी. और डी.आई.जी. द्वारा उनके क्षेत्रों के अधीन आने वाले जि़लों की इस बाबत प्राप्तियों सम्बन्धित महीनावार रिपोर्ट समेत अर्ध सरकारी पत्र लगाकर बिना देरी हर महीने की 5 तारीख से पहले-पहले अतिरिक्त डायरैक्टर जनरल पुलिस ( ए.डी.जी.पी. कानून और व्यवस्था) को भेजी जाएगी। पंजाब पुलिस के प्रमुख ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए कि वह आबकारी विभाग के अधिकारियों और ठेका लाइसेंसधारकों के साथ लगातार संपर्क में रह कर फीडबैक लेने और नशा-तस्करों / सप्लाई करने वालों / नाजायज़ शराब बनाने वालों पर नकेल कसने के लिए पूरी मुस्तैदी और संजीदगी से यत्न करें। डी.जी.पी. ने चेतावनी दी कि इसमें किसी प्रकार की असफलता को गंभीरता से लिया जाएगा। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । पंजाब सरकार ने प्राईवेट स्कूलों को 2020-21 की फ़ीसों में साल 2019 -20 के दौरान ली गई फ़ीसों के मुकाबले कोई वृद्धि न किये जाने की सलाह दी है। राज्य में सभी प्राईवेट और अनएडिड (ग़ैर सहायता प्राप्त) स्कूलों के प्रबंधकों /प्रिंसिपलों को लिखे पत्र में डायरैक्टर, पब्लिक इंस्ट्रकशनज़(सैकेंडरी शिक्षा) सुखजीत पाल सिंह ने बताया कि यह फ़ैसला तालाबन्दी के मद्देनजऱ लिया गया है। इस पत्र में स्कूलों के प्रबंधकों / प्रिंसिपलों को कहा गया है कि उनकी तरफ से बच्चों के माता-पिता को मासिक या त्रैमासिक फीस भरने की छुट दी जाये। स्कूलों प्रबंधकों को उन बच्चों के मामले को और भी ध्यान और हमदर्दी से विचारने के लिए कहा गया है जिनके माता-पिता की आजीविका तालाबंदी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे विद्यार्थियों को फीस में रियायत / फीस माफ करने के लिए भी कहा गया है और फीस न भरे जाने पर किसी भी बच्चे की शिक्षा (ऑनलाइन या रेगुलर) प्राप्ति को न रोके जाने के लिए भी कहा गया। यह भी हिदायत की गई है कि स्कूल प्रबंधन की तरफ से किसी भी अध्यापक को हटाने या मासिक वेतन में कटौती या टीचिंग / नॉन-टीचिंग स्टाफ के कुल खर्चों में कोई कटौती न की जाये। स्कूल ऑनलाइन / डिस्टैंस लर्निंग प्रदान करने का यत्न करेंगे जिससे कोविड - 19 के मद्देनजऱ मौजूदा या भावी तालाबन्दी के कारण शिक्षा पर बुरा प्रभाव न पड़े। यह भी कहा गया है कि स्कूलों की तरफ से गर्मियों की छुट्टियों को छोड़ कर तालाबंदी/कफ्र्यू के दौरान कोई फीस न ली जाये। हालाँकि, जिन स्कूलों ने तालाबन्दी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की है या प्रदान कर रहे हैं, वह बिल्डिंग के खर्चे, परिवहन के खर्चे, खाने के खर्चे आदि के सिवाय सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर । लॉकडाउन के दौरान निरंतर कार्य करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने राजस्थान में एक करोड़ 28 लाख से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर का वितरण किया। साथ ही 48 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की गई। इस विषम परिस्थिति में भी सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने में इन कंपनियों के वितरकों और घर-घर सिलेन्डर पहुंचाने वाले गैस बॉयज का सर्वाधिक योगदान रहा। तीनों ही तेल कंपनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा कस्टमर अटेंडेंट ने भी ‘हर काम देश के नाम’ की भावना के साथ काम किया। देश की कई नामचीन हस्तियों ने गैस बॉयज और कस्टमर अटेंडेंट के जज्बे की सराहना की है। राजस्थान में तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक सुनील गर्ग ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा कुल 12 तेल टर्मिनल डिपो तथा 11 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट का लगातार संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य में कुल एक हजार 373 एलपीजी वितरक हैं जो लगभग एक करोड़ 62 लाख सक्रिय एलपीजी ग्राहकों को सेवा दे रहे हैं। राज्य भर में 4035 रिटेल आउटलेट्स लगातार आम जनता की ईंधन की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। सुनील गर्ग ने बताया कि ईंधन और सिलेन्डर की आपूर्ति से संबन्धित सभी सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम से संबन्धित सभी दिशा-निर्देशों का भी पालन किया जा रहा है। इसलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। कोरोना के कारण लॉकडाउन जैसे मुश्किल हालात में भी ईंधन एवं एलपीजी की आपूर्ति से संबन्धित अधिकारी, कर्मचारी, एलपीजी वितरक, रिटेल आउटलेट्स मालिक और इनके कर्मचारी, सिलेंडर डेलीवरी बॉयज तथा ट्रक और टैंकर चालक ने जिस निष्ठा, प्रतिबद्धता और हौसले का परिचय दिया है इसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। गर्ग ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इनका मनोबल बनाए रखने की हर संभव कोशिश करें।   साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रभाव से रियल स्टेट प्रोजेक्ट भी बन्द पड़े है। इस विषम उत्पन्न स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा रियल स्टेट बिजनेस में राहत पहुँचाने के लिये अति महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये है। इस संबंध में नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल से रेरा के अध्यक्ष एन.सी. गोयल ने बुधवार को उनके निवास स्थान पर चर्चा की। रेरा द्वारा जारी आदेशों में बताया गया है कि राज्य सरकार एवं राजस्थान रियल रेगुलेटरी ऑथरटी के स्तर पर रियल स्टेट बिजनेस से जुड़े क्रेडाई, टोडार, राहड़ा आदि के प्रतिनिधियों द्वारा दिये गये प्रतिवेदनों पर सकारात्मक विचार कर रेरा एक्ट की धारा 6 व धारा 8 में दिये गये प्रावधानों के अनुसार ऐसे समस्त प्रोजेक्ट जो प्रदेश में लॉकडाउन शुरू होने की दिनांक 19 मार्च, 2020 तक पूर्ण नहीं हुए थे। उन सभी को प्रोजेक्ट पूर्ण करने की एक वर्ष की अवधि विस्तारित किये जाने का निर्णय लिया गया है साथ ही इस विस्तारित अवधि के लिये फीस भी माफ कर दी गयी है। परन्तु रेरा द्वारा 16 अगस्त, 2019 को जारी आदेश के क्रम में निर्धारित स्टेण्डर्ड फीस देय होगी। उन्हीं प्रोजेक्ट को अवधि विस्तार दिया जायेगा, जिनका रजिस्ट्रेशन 19 मार्च, 2020 को विधिवत मान्य था। विस्तारित अवधि के लिए निर्धारित फॉर्म-एफ में प्रमाण-पत्र रेरा द्वारा जारी किया जायेगा। जिसके लिए विकासकर्ता को ऑनलाईन आवेदन करना होगा। विस्तारित अवधि हेतु नियमानुसार आवश्यक प्रमाण-पत्र भी 30 जून, 2020 तक ऑनलाईन ही जारी कर वेबसाईट पर उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है। संबंधित विकासकर्ता अपनी पूर्व में रजिस्टर्ड परियोजना हेतु रेरा की वेबसाईट के पोर्टल के माध्मय से ऑथरिटी को आवेदन पत्र में उपरोक्त प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु ऑनलाईन ही आवेदन कर सकेंगे, 30 जून, 2020 से पहले यह सुविधा प्रारम्भ कर दी जायेगी। विकासकर्ता द्वारा अपने प्रोजेक्ट की त्रैमासिक रिपोर्ट वेबसाईट पर प्रदर्शित करनी होती है, जिसमें भी मार्च, 2021 तक छूट दी गई है। रिफंड के आदेशों की क्रियान्विति के लिए विकासकर्ता के विरूद्ध कठोर कार्यवाही 31 मार्च, 2021 तक नहीं की जायेगी। विकासकर्ता अपने रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स को एक से अधिक चरणों में विभाजित कर सकेंगे, और बिल्डिंग प्लान में ऐसे संशोधन कर सकेंगें की आवंटियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े। ऐसे सभी परिवर्तनों के लिए न्यूनतम दो तिहाई आवंटियों की सहमति भी आवश्यक होगी। साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में यहां आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार का कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत लगाए लाॅकडाउन के कारण प्रभावित अर्थ-व्यवस्था से निपटने के लिए देश को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा के लिए उनका धन्यवाद किया। मंत्रिमण्डल ने कहा कि यह आर्थिक पैकेज कमजोर वर्गों, एमएसएमई, व्यापार समुदाय, कामगारों व आम जनता को आवश्यक राहत प्रदान कर देश की अर्थ-व्यवस्था को पुनर्जिवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पैकेज भारत को मजबूत, जीवंत और आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। मंत्रिमण्डल ने फैक्ट्री एक्ट 1948 में आॅफेसिंस को कम्पाउंड करने के लिए धारा-2 (एम) (प), 2 (एम) (पप), धारा-65 (3) (पअ), धारा-85(1) (प) में संशोधन करने और नई धारा 106 (बी) की प्रविष्टि करने की अनुमति दी। इससे राज्य में छोटी इकाइयों में उत्पाद गतिविधियों के लिए श्रमिकों की वर्तमान सीमा 10 और 20 को बढ़ाकर क्रमशः 20 और 40 किया जाएगा। इस संशोधन से छोटी विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा और श्रमिकों को रोजगार के अधिक अवसर सृजित होंगे। इसी तरह, वर्तमान में कोई भी कर्मचारी किसी भी तिमाही में अधिकतम 75 घंटे ओवर टाइम काम कर सकता है। लेकिन धारा-65 के खंड (4) 3 संशोधन में इस सीमा को बढ़ाकर 115 घंटे करना प्रस्तावित है। इसमें ओवरटाइम का भुगतान साधारण मजदूरी की दर से दोगुना करने की शर्त होगी, ताकि श्रमिकों को आय के अधिक अवसर मिल सकें। मंत्रिमण्डल ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14वां) की धारा-22, (1) धारा 25 एफ (बी) धारा-25-के में संशोधन करने पर भी अपनी सहमति दी। इससे औद्योगिक निवेश, उत्पादन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य में व्यापार करने में आसानी होगी। इससे औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अनुकूल और व्यापार मित्र वातावरण पर्यावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और कामगारों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मंत्रिमण्डल ने जिला मंडी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टीहरा को 50 बिस्तरों वाले नागरिक अस्पताल में स्तरोन्नत करने की मंजूरी प्रदान की। मंत्रिमंडल ने कुल्लू जिले के भेखली में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में जिला सिरमौर की तहसील नाहन में ग्राम कंुडला (गुमटी) में मैसर्स एल्को स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में आश्रय पत्र की वैधता अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया, ताकि कंपनी को परियोजना के काम को पूरा करने में सुविधा हो सके, इसमें कोविड-19 महामारी के कारण विलम्ब हो रहा था। मंत्रिमंडल ने पोस्ट कोविड-19 इकाॅनोमिक रिवाइवल के लिए गठित मंत्रिमंडलीय सब कमेटी के प्रस्ताव पर आयकर दाताओं को लक्षित सार्वजनिक वितरण योजना के तहत सब्सिडी का लाभ पाने से एक साल के लिए बाहर रखने की मंजूरी दी। मंत्रिमंडल ने बीपीएल/प्राथमिकता वाले परिवारों के लाभार्थियों के चयन के लिए ऊपरी आय सीमा को बढ़ाकर 45000 रुपये प्रस्तावित किया। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम परिवारों की संख्या 1,50,000 तक बढ़ जाएगी, जिससे वे 3.30 रुपये प्रति किलो गेहूं आटा और 2 रुपये प्रति किलो चावल बहुत ही रियायती दरों पर लेने के लिए पात्र हो जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा एपीएल परिवारों को दी जा रही दालों, खाद्य तेल और चीनी पर सब्सिडी के युक्तिकरण के लिए भी अपनी स्वीकृति प्रदान की। मंत्रिमंडल ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में 15 अटल आदर्श विद्यालय खोलने का निर्णय लिया, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । हरियाणा में कोरोना वायरस के मरीजों का आंकड़ा 783 तक जा पहुंचा है. वहीं अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है। जबकि कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 421 हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक फरीदाबाद में 56, गुरुग्राम में 107 , सोनीपत में 94, झज्जर में 74, पानीपत में 18 कोरोना के एक्टिव पॉजिटिव केस है। जबकि अब तक 351 मरीज ठीक हो चुके है।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार बुधवार सुबह तक देश में पिछले 24 घंटों में 3,525 कोरोनावायरस के मामले सामने आए हैं और 122 मौतें हुई हैं। देश में पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या अब 74,281 हो गई है इसमें 47,480 सक्रिय मामले, 24386 ठीक / डिस्चार्ज /माइग्रेट मामले और 2,415 मौतें शामिल हैं। भारत में कोरोनावायरस संक्रमण के चलते मंगलवार सुबह तक 2 हजार 293 मौतों सहित कोविड-19 से संक्रमित हुए लोगों का कुल आंकड़ा 70 हजार 756 हो गया था । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ताजा आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा, "वर्तमान में 46 हजार 08 लोग कोरोना महामारी से ग्रस्त हैं, जबकि उपचार के बाद पूर्ण रूप से स्वस्थ हुए कुल 22 हजार 454 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।" वहीं, अंडमान निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर और मिजोरम कोरोना से मुक्त राज्य बने हुए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश में 45 लोगों की मौत सहित कोरोना पीड़ितों की संख्या 2 हजार 18 हो गई है, जिनमें से 975 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। असम में कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा 65 पहुंच गया है, जिनमे से 34 को अस्पताल से छुट्टी दी गई है। यहां सिर्फ 2 लोगों की इस बीमारी की वजह से मौत हुई है। उधर, बिहार में कोरोना से संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक 747 लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिनमे से 377 को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि यहां 6 लोगों की मौत हुई है। चंडीगढ़ में कोरोना पीड़ितों की संख्या 174 पहुंच गई है और उपचार के बाद 24 को डिस्चार्ज किया गया। यहां दो की मौतें देखने को मिली हैं। छत्तीसगढ़ में यह संख्या 59 बनी हुई हैं और 53 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया है। दादर नगर हवेली में अब तक सिर्फ एक शख्स की इस बीमारी से संक्रमित होने की सूचना है। राजधानी दिल्ली में कुल 73 मौतों के साथ ही संक्रमितों की संख्या 7 हजार 233 पहुंच चुकी है, जबकि उपचार के बाद 2 हजार 129 को डिस्चार्ज किया गया। गुजरात में यह आकड़ा 8 हजार 541 पहुंच गया है, जिसमें से 513 लोगों की मौत हुई है और 2 हजार 780 को डिस्चार्ज किया गया है। हरियाणा में कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा 730 हो गया है, यहां 337 को डिस्चार्ज किया गया और 11 की मौत हुई है। हिमाचल में मंगलवार सुबह तक 69 मामले सामने आए हैं। यहां 39 को डिस्चार्ज किया गया है। जम्मू एवं कश्मीर में यह संख्या 879 पहुंच चुकी और 427 को डिस्चार्ज किया गया है। केंद्र शासित प्रदेश में 10 लोगों की महामारी के चलते मौत हुई है। झारखंड में तीन लोगों की मौत के साथ कोरोना पीड़ितों की संख्या 160 पहुंच चुकी है, जिसमें से 78 को डिस्चार्ज किया गया है। कर्नाटक में यह संख्या 31 मौतों के साथ 862 है और यहां 426 को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया है। वहीं, केरल में मंगलवार सुबह तक कोरोना पीड़ितों की संख्या 519 रही, जिनमें से 489 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए और चार लोगों की मौत हुई। इस बीच लद्दाख में कोरोना पीड़ितों की संख्या 42 हो गई है और 21 लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। मध्यप्रदेश में कोरोना तेजी से पांव पसार रहा है। मंगलवार सुबह तक 121 मौतों के साथ यहां यह आंकड़ा कुल 3 हजार 785 रहा, जबकि 1 हजार 747 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। उधर, महाराष्ट्र में अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है । अब तक मिली रिपोर्ट के मुताबिक यहां 23 हजार 401 लोग कोरोना वायरस से पीड़ित बताए गए हैं, इनमें से 4 हजार 786 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है और 868 लोगों की मौत हुई है। मेघालय में 13 मामले सामने आए हैं, और 10 पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। उड़ीसा में अब तक 414 मामले सामने आए हैं और 85 को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। यहां तीन की मौत हुई है। पुडुचेरी में सिर्फ 12 मामले सामने आए हैं और 6 को डिस्चार्ज किया गया है। पंजाब में मंगलवार सुबह तक 1 हजार 877 मामले सामने आए हैं और 168 को डिस्चार्ज किया गया। 31 लोगों की अब तक मौत हो गई है। राजस्थान में यह आंकड़ा 3 हजार 988 पहुंच चुका है, जबकि 2 हजार 264 को डिस्चार्ज किया गया है। 113 की यहां मौत हो गई है । उधर, तमिलनाडु में कोरोना पीड़ितों की संख्या 8 हजार 02 पहुंच गई है, जबकि 2 हजार 54 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। यहां 53 लोगों की मौत हुई है। तेलंगाना में 1 हजार 275 मामले सामने आए हैं, जिसमें से 800 को डिस्चार्ज किया गया। यहां 30 की मौत हुई है। इस बीच त्रिपुरा में 152 मामले सामने दर्ज किए गए हैं और 2 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। उत्तराखंड में 68 मामले सामने आए हैं, जिसमें से 46 को डिस्चार्ज किया गया। यहां एक की मौत हुई है । उत्तर प्रदेश में कोरोना पीड़ितों की संख्या 3 हजार 573 हो गई है। 1 हजार 758 को डिस्चार्ज किया गया ।यहां 80 मौतें हुई हैं। उधर, पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 2 हजार 63 पहुंच चुका है। यहां 499 लोग डिस्चार्ज हो चूके हैं, जबकि यहां 190 मरीजों की मौत हुई है।   साभार-khaskhabar.com

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For Odia migrant workers in Surat, the road back home is fraught with uncertainty. With Supreme Court staying Orissa High Court order that directed migrant workers be allowed entry to Odisha only after testing negative for COVID-19, the ball is now in the State Government’s court. Defying lockdown norms, hundreds of migrant workers from Odisha came on roads here upon learning the Odisha government has revoked permission to three trains which were scheduled to leave from Surat city of Gujarat on Friday. Surat-based powerlooms and textile units employ thousands of people from the eastern state who are now stranded and out of job due to the coronavirus-enforced lockdown. Before the situation escalated, police stepped in and persuaded the restless migrant workers, who numbered in hundreds, to disperse, said officials. “They were anxious after learning that the Odisha government has cancelled permission given to the three trains coming from Surat carrying migrant workers (following a court order). “We urged them to keep calm and made them aware about the court order. They peacefully returned to their homes,” said Deputy Commissioner of Police R.P.  Barot.Till now, as many as 18 Shramik Special trains, each carrying 1,200 migrants, have left for Odisha from Surat. Surat collector Dhaval Patel told reporters that all the three trains scheduled for May 8 stand cancelled following an Odisha High Court order pronounced on Thursday. “As per the order, only those testing negative for coronavirus will be allowed to board (Odisha-bound) trains. People can not go unless their report comes negative. “Thus, the Odisha government has cancelled the three trains which were scheduled to depart from here on Friday,” said Patel. He said the district administration has urged the Railway authorities to refund the ticket fare. साभार-khaskhabar.com    

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चंडीगढ़ । पंजाब में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। कोरोना के पूरे पंजाब में अब तक 1731 पॉजिटिव केस सामने आ चुके है। इसमें से एक्टिव मरीजों की संख्या 1550 है, जबकि 152 मरीज ठीक हो चुके है। जबकि कोरोना के चलते 29 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। साभार-khaskhabar.com

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नासिक: महाराष्ट्र के नासिक के शैतानपुर इलाके में आज एक कारखाने में आग लग गई। मौके पर फायर ब्रिगेड की 10 गाड़‍ियां मौके पर पहुंची हैं आज सुबह से देश में कई हादसे हुए हैं इससे पहले तमिलनाडु तमिलनाडु के नेवेली में बॉयलर फटने से सात लोग घायल हो गए। आज सुबह विशाखापट्टनम के पास एक केमिकल फैक्टरी में गैस रिसाव होने के बाद वहां 11 लोगों की मौत हो गई थी। साभार-khaskhabar.com

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