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राजस्थान में मनरेगा के तहत श्रमिक नियोजन हुआ 22 लाख से अधिक || पीएम गरीब कल्याण पैकेज से हिमाचल को लगभग 244 करोड़ रुपए ट्रांसफ़र - अनुराग ठाकुर || MATHURA : सीमा में ई-पास से वाहनों के प्रवेश

मुंबई,| भारतीय शेयर बाजार बुधवार को प्रमुख घरेलू कंपनियों के बेहतर नतीजे से गुलजार रहा। जोरदार लिवाली आने से सेंसेक्स 622.44 अंकों यानी 2.06 फीसदी की जबदरस्त तेजी के साथ 30,818.61 पर बंद हुआ और निफ्टी भी 9000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर विराम लिया। निफ्टी पिछले सत्र से 187.45 अंकों यानी 2.11 फीसदी की बढ़त बनाकर 9066.55 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सत्र के आरंभ में पिछले सत्र से 36.58 अंकों की कमजोरी के साथ 30,159.59 पर खुला और 30,878.31 तक उछला जबकि इसका निचला स्तर 30,157.75 रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र से 10.05 अंकों की बढ़त के साथ 8889.15 पर खुला और 9093.80 तक चढ़ा जबकि निफ्टी का निचला स्तर 8875.35 रहा। बीएसई मिडकैप सूचकांक पिछले सत्र से 166.09 अंकों यानी 1.49 फीसदी की तेजी के साथ 11,278.22 पर बंद हुआ जबकि स्मॉलकैप सूचकांक 117.19 अंकों यानी 1.13 फीसदी की तेजी के साथ 10,472.37 पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में 26 शेयरों में तेजी रही जबकि चार शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच शेयरों में एमएंडएम (5.92 फीसदी), एचडीएफसी (5.61 फीसदी), एलएंडटी (4.85 फीसदी), टाटास्टील (4.17 फीसदी) और बजाज फाइनेंस (3.85 फीसदी) शामिल रहे। वहीं, सेंसेक्स के गिरावट वाले चार शेयरों में इंडसइंड बैंक (2.85 फीसदी), हीरोमोटोकॉर्प (2.45 फीसदी), भारती एयटेल (0.85 फीसदी) और एशियन पेंट (0.35 फीसदी) शामिल रहे। बीएसई के 19 सेक्टरों में से 18 सेक्टरों के सूचकांकों में तेजी रही जबकि एक में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच सेक्टरों में हेल्थकेयर (3.16 फीसदी), कैपिटल गुड्स (3.12 फीसदी), फाइनेंस (2.90 फीसदी), कंज्यूमर डयूरेबल्स (2.68 फीसदी) और तेल व गैस (2.52 फीसदी) शामिल रहे। वहीं, टेलीकॉम सेक्टर का सूचकांक 1.58 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में कैपिटल गुड्स (1.38 फीसदी), एनर्जी (1.33 फीसदी), रियल्टी (0.60 फीसदी), बैंक इंडेक्स (0.13 फीसदी), हेल्थ (0.12 फीसदी) एवं इंडस्ट्रियल (0.12 फीसदी) शामिल रहे। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली :विश्व बैंक ने भारत को 1 बिलियन डॉलर का पैकेज दिया । यह पैकेज सामाजिक सुरक्षा के लिए है। आपको बता दें देश में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24घंटों में भारत में कोरोना वायरस के मामलों में 3,967 की बढ़त हुई है और 100 मौतें हुई हैं। देश में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या अब 81,970 है(इसमें 51,401 सक्रिय मामले, 27,920ठीक हो चुके/डिस्चार्ज/विस्थापित मामले, 2,649मौतें शामिल हैं। साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के बैनर तले प्रदेश की सभी 247 मंडियों के जींस कारोबारी हड़ताल पर हैं और मंडी में कारोबार ठप पड़ा हुआ है। व्यापारी संगठन ने 15 मई तक राज्य की सभी मंडियां बंद रखने का एलान किया है। राजस्थान खादय पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "प्रदेश सरकार द्वारा लगाई गई कृषक कल्याण फीस के विरोध में मंडियां बंद रखी गई हैं। सरकार ने मंडियों में कृषि उपजों के व्यापार पर दो फीसदी कृषक कल्याण फीस लगा दी है, जिससे प्रदेश की मंडियों में कारोबार पर असर पड़ेगा, इसलिए व्यापारी आढ़ती और किसान नई मंडी फीस का विरोध कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कृषि विपणन अधिनियम 1961 के अनुसार, एक फीस पहले से ही लागू है और सरकार ने अब यह दूसरी फीसदी लगा दी है। बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि 1.60 रुपए प्रति सैकड़ा फीस पहले से लागू है और अब दो फीसदी यानी दो रुपए प्रति सैकड़ा नई फीस लगने के बाद राजस्थान में मंडी फीस 3.60 रुपए प्रति सैकड़ा हो जाएगी, जिससे प्रदेश में व्यापार का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश का जींस कारोबार गुजरात और दिल्ली को शिफ्ट होगा क्योंकि गुजरात में मंडी फीस महज 50 पैसे प्रति सैकड़ा है जबकि दिल्ली में ऐसी कोई मंडी फीस नहीं है। राजस्थान कृषि उपज मंडी (संशोधन) अध्यादेश 2020 द्वारा राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 में संशोधन करते हुए इसके खंड 38 की धारा 17 में 71-क की नई धारा जोड़ी गई है जिसके तहत प्रदेश की मंडियों में खरीदी या बेची जाने वाली कृषि उपज पर कृषक कल्याण फीस ली जाएगी और संग्रहित फीस अधिनियम की धारा-19 के के तहत गठित कृषक कल्याण कोष में जमा होगी।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। पूरी दुनिया जब कोरोना महामारी के कहर से जूझ रहा है तब भारत सरकार के अन्नागार में अनाज का इतना भंडार है कि 10 महीने तक खाद्य सुरक्षा समेत तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए खाद्यान्न की कमी नहीं होगी। केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने मंगलवार को बताया कि भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई के पास इस समय 630 लाख टन से ज्यादा का अनाज का भंडार है जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम यानी एनएफएसए और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए हर महीने 60 लाख टन अनाज की जरूरत होती है। इस प्रकार 10 महीने से ज्यादा की खपत के लिए एफसीआई के पास अनाज का भंडार पड़ा हुआ है। कोरोना संकट के समय मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों और सरकार के पास उपलब्ध अनाज और दाल के कुल स्टॉक के साथ-साथ राज्यों को अबतक भेजे गये अनाज और दाल की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक बयान में कहा कि चार मई तक एफसीआई के पास 276.61 लाख टन चावल और 353.49 लाख टन गेहूं है। इस प्रकार अनाज का कुल स्टॉक 630.10 लाख टन है। वहीं, एनएफएसए और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत एक माह के लिए लगभग 60 लाख टन अनाज की आवश्यकता होती है। मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अगले तीन माह के लिए 104.4 लाख टन चावल एवं 15.6 लाख टन गेहूं की आवश्यकता है जिसमें 59.50 लाख टन चावल एवं 8.14 लाख टन गेहूं का उठाव विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए हो गया है। मंत्रालय ने बताया कि भारत सरकार इस योजना का शत-प्रतिशत वित्तीय भार वहन कर रही है जो लगभग 46000 करोड़ रुपये है। इस योजना के तहत प्रत्येक राशनकार्ड पर एक किलो दाल प्रति परिवार देने का प्रावधान है जिसके लिए दाल की कुल आवश्यकता अगले तीन माह के लिए 5.82 लाख टन है और अब तक 220727 टन दाल डिस्पैच हो चुका है। वहीं 147165 टन दाल राज्यों में पहुंच चुकी है और 47490 टन का वितरण किया जा चुका है। मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पांच मई, 2020 को बफर स्टॉक में 12.54 लाख टन दाल उपलब्ध था। साभार-khaskhabar.com  

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सैन फ्रांसिस्को| क्यूपर्टिनो स्थित टेक दिग्गज एप्पल ने कथित तौर पर आईमैसेंजर के लिए एक नया पेटेंट दायर किया है, जिसके माध्यम से यूजर्स पहले ही भेजे जा चुके मैसेज को एडिट कर सकेंगे। यूएस पेटेंट और ट्रेडमार्क ऑफिस ने हाल ही में एप्पल द्वारा एक नए पेटेंट को लेकर दायर एप्लीकेशन को प्रकाशित किया है, जो आईमैसेंजर के माध्यम से भेजे गए संदेशों को पूरी तरह से एडिट करने में सक्षम है। मैक रयूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह उस संदेश का चयन करके का काम करेगा, जिसे यूजर्स पूर्व-निर्धारित टच इंटरफेस इनपुट द्वारा एडिट करना चाहता है। शामिल किए गए पेटेंट ड्राइंग में एक शो एडिट्स बटन को दिखाया गया है, यह बदलाव की हिस्ट्री को दिखा सकता है। मैसेज को एक्नॉलेज करना, डिस्प्ले प्राइवेट मैसेज, यूजर्स के बीच सिंक्रनाइज व्यूइंग ऑफ कंटेंट, विदेशी भाषा पाठ का अनुवाद करना और भी बहुत कुछ अन्य नई विशेषताओं में शामिल हैं। साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। फेसबुक के स्वामित्व वाली फोटो और वीडियो शेयरिंग ऐप इंस्टाग्राम ने 'चैलेंज स्टीकर इन द स्टोरीज गैलरी' नामक एक नई सुविधा शुरू की है। इंस्टाग्राम इस शनिवार से स्टोरीज में चैलेंज यानी चुनौतियों का परीक्षण कर रहा है, जो स्टिकर के माध्यम से चुनौतियों को आसान बनाता है। इसमें दोस्तों के नामांकन से चुनौतियों में शामिल होना आसान बनाया जाता है। कंपनी ने एक बयान में कहा, "हमने देखा है कि चुनौतियां सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ बातचीत करने का एक मजेदार तरीका है और लोकप्रिय चुनौतियों में शामिल होने के लिए लोग टेक्स्ट और हैशटैग का उपयोग कर रहे हैं।" इस नए स्टिकर के साथ, लोग अपने दोस्तों को भाग लेने और नामांकित करने में सक्षम होंगे। अगर किसी यूजर को अन्य लोगों की स्टोरीज को देखते समय कोई चुनौती सामने आती है, तो वह यूजर स्टिकर पर टैप करके स्वयं इसे आजमा सकता है। इसकी खासियत यह है कि बिना नामांकित हुए भी कोई भी चुनौती का प्रयास कर सकता है। फेसबुक के स्वामित्व वाले ऐप ने कहा, "वैकल्पिक रूप से जब कोई व्यक्ति आपको चुनौती के लिए नामित करता है तो आपको एक सीधा संदेश (डीएम) मिलेगा, जिसमें आपका मित्र आपकी स्टोरी में आपका उल्लेख करेगा।" कंपनी ने कहा, "जब आप उनकी स्टोरी में टैप करते हैं, जहां आप नामांकित होते हैं, तो आप 'ट्राई दिस चैलेंज' के साथ इस चुनौती पर टैप कर सकते हैं। फिर आप इसे अपनी कहानी में साझा कर सकते हैं और अपने नामांकनकर्ता को भी इसमें टैग किया जाएगा।" इस परीक्षण के लिए हर कोई चुनौतियों में भाग लेने में सक्षम होगा, लेकिन चुनौतियां सीमित संख्या में ही उपलब्ध होंगी। कुछ हफ्ते पहले इंस्टाग्राम ने 'स्टे होम' और 'घर पे रहो' स्टिकर भी लॉन्च किए हैं, जिससे यूजर्स देख सकते हैं कि अन्य लोग किस तरह से लॉकडाउन के दौरान सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं।     साभार-khaskhabar.com

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बेंगलुरू। कंप्यूटर बनाने वाली विश्व स्तर की दिग्गज कंपनी लेनोवो ने शुक्रवार को भारत में अपने ब्रांड के अलावा सभी लैपटॉप और डेस्कटॉप ग्राहकों को चौबीस घंटे तकनीकी समर्थन देने की घोषणा की, ताकि देशव्यापी लॉकडाउन के बीच उपभोक्ताओं के दबाव को कम किया जा सके। तकनीकी सहायता तीन मई तक उपलब्ध होगी, जो देश में दूसरी लॉकडाउन अवधि का अंतिम दिन है। लेनोवो इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक राहुल अग्रवाल ने एक बयान में कहा, चाहे वह तकनीक हो या जरूरतमंद लोगों की मदद करना, लेनोवो हर मोर्चे पर इस महामारी से लड़ने के लिए समर्पित है। ग्राहक किसी भी तरह की दिक्कत का सामना कर रहे हैं तो वे टोल-फ्री नंबर 1800 419 5253 पर संपर्क कर सकते हैं, जो कि 24 घंटे खुला रहेगा। अग्रवाल ने कहा, सार्वजनिक प्रतिबंध और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण चल रही महामारी से लेनोवो अपने ग्राहकों के साथ-साथ समुदाय को भी मदद की पेशकश करेगा। तकनीकी हेल्पलाइन ग्राहकों को बुनियादी और सामान्य सहायता प्रदान करेगी। तकनीकी समर्थन बुनियादी ऑपरेटिंग सिस्टम से संबंधित समस्या निवारण के लिए सहायता प्रदान करेगा। इसके साथ ही हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर के साथ समस्याओं की पहचान करना, प्रिंटर और स्कैनर जैसे तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के उपकरणों की स्थापना, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर जैसे ऑफिस और एंटीवायरस आदि से संबंधित मुद्दों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं कंप्यूटर या लैपटॉप में आने वाली अन्य परेशानियां जैसे सिस्टम का धीमे काम करना और इंस्टालेशन व डिलीट करने जैसी कामों में भी सहायता की जाएगी। लॉकडाउन के बाद लेनोवो के लैपटॉप और अन्य सामानों की बिक्री में भी वृद्धि देखी गई है।   साभार-khaskhabar.com

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मुंबई़। कोरोना महामारी से मिल रही आर्थिक चुनौतियों से निपटने और देश की अर्थव्यवस्था को इस संकट से निकालने के लिए आरबीआई ने शुक्रवार को रिवर्स रेपो रेट में कटौती के साथ-साथ कतिपय उपायों की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने देश की अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाने, बैंक के साख प्रवाह में इजाफा करने और वित्तीय संकट को दूर करने के मकसद से गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और माइक्रो फाइनेंशियल इंस्टीटयूशंस को टारगेटेड लांग टर्म रेपो ऑपरेसंस (टीएलटीआरओ) के जरिए 50,000 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता करने की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर ने कोरोना के संकट से अर्थव्यवस्था को उबारने और बाजार में नकदी के संकट को दूर करने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की मदद करने की घोषणा की। दास ने कहा कि कोरोना के कारण उभरते हालात पर केंद्रीय बैंक की लगातार नजर बनी रहेगी और और आरबीआई अपने टूल का उपयोग करके स्थिति से निपटने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि बैंकों की एलसीआर यानी ततरलता कवरेज अनुपात की आवश्यकता 100 फीसदी से घटकर 80 फीसदी हो गई है जिसे अगले साल अप्रैल तक चरणों में दुरूस्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले आदेश तक बैंक किसी भी लाभांश का भुगतान नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि नाबार्ड, सिडबी, एनएचबी जैसे वित्तीय संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपए का विशेष वित्तीय सुविधा दी जाएगी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोना के प्रकोप के चलते आर्थिक गतिविधयां चरमरा गई हैं। आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करके इस चार फीसदी से घटाकर 3.75 फीसदी कर दिया। रिवर्स रेपो रेट ब्याज की वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनके द्वारा लघु अवधि में जमा की गई राशि पर ब्याज देता है। वहीं, वाणिज्यिक बैंक जिस दर पर केंद्रीय बैंक से अल्पकालीन ऋण लेता है उसे रेपो रेट कहते हैं।   साभार-khaskhabar.com

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मुंबई। देशव्यापी लॉकडाउन के कारण घरेलू हाजिर बाजार बंद है, मगर वायदा बाजार में सोना लगातार नये शिखर को छूता जा रहा है। पिछले सत्र में विदेशी बाजार में सोने में आई जोरदार तेजी के कारण बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोना फिर नई उंचाई पर चला गया। हालांकि बाद में मुनाफावसूली के चलते रिकॉर्ड उंचाई से सोने के भाव में गिरावट आई। एमसीएक्स पर सोना 46,785 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद मुनाफावसूली बढ़ने और विदेशी बाजार में बुधवार को कमजोरी आने के कारण फिसल गया। चांदी में भी गिरावट आ गई। मध्यान्ह 12.23 पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने के जून अनुबंध में पिछले सत्र से 186 रुपए की कमजोरी के साथ 46100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले सोने का भाव 46785 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक उछला। वहीं, चांदी के मई अनुबंध में पिछले सत्र से 142 रुपये की कमजोरी के साथ 43614 रुपये प्रति किलो पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले चांदी का भाव 44584 रुपये प्रति किलो तक उछला। बता दें कि पिछले सत्र में मंगलवार को विदेशी वायदा बाजार कॉमेक्स पर सोने में जोरदार तेजी आई थी और सोने का जून अनुबंध 1788.80 डॉलर प्रति औंस तक उछला था जोकि तकरीबन आठ साल का उंचा स्तर है। डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर मंगलवार को अवकाश होने के कारण घरेलू वायादा बाजार में कारोबार बंद था, इसलिए बुधवार को एमसीएक्स पर सोने और चांदी के वायदा अनुबंधों में शुरूआती कारोबार में जोरदार तेजी आई। कमोडिटी बाजार के जानकारों ने बताया कि कोरोना के कहर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर छायी मंदी की आशंकाओं से सोना निवेशकों का पसंदीदा इन्वेस्टमेंट टूल यानी निवेश का उपकरण बना हुआ है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि सोने में बहरहाल सारे फंडामेंटल्स तेजी के हैं क्योंकि दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने और कोरोना के कहर से निपटने के लिए आर्थिक पैकेज दिए जाने से सोने को सपोर्ट मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां चरमरा गई हैं और शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कम हुआ है जिससे सोने के प्रति उनका रुझान बढ़ा है। जेम्स ज्वेलरी ट्रेड काउंसिल ऑफ इंडिया यानी जीजेटीसीआई के प्रेसीडेंट शांतिभाई पटेल ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार से मिले संकेतों से घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी में कारोबार चालित होता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण घरलू सर्राफा बाजार में हाजिर का कारोबार बंद है। उन्होंने कहा कि पीली धातुओं में फिलहाल तेजी का रुख बना हुआ है और आने वाले दिनों सोना और महंगा होगा। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स पर सोने के जून अनुबंध में पिछले सत्र से 28.90 डॉलर यानी 1.63 फीसदी की कमजोरी के साथ 1740 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था। वहीं चांदी के मई अनुबंध में पिछले सत्र से 3.06 फीसदी की कमजोरी के साथ 15.63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था।  साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। देशव्यापी लॉकडाउन के कारण श्रमिकों और लॉजिस्टिक्स की समस्या के कारण दवा कंपनियों के कारोबार पर भी असर पड़ा है। दवा कंपनियों में तकरीबन 60 फीसदी उत्पादन ठप पड़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में देश में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की किल्लत की आशंका भी बनी हुई है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत आने वाले औषधि विभाग ने भी इसकी आशंका जताई है। कोरोनावायरस के संक्रमण से फैली महामारी की रोकथाम में प्रभावी कदम के तौर पर किए गए देशव्यापी लॉकडाउन में हालांकि दवा और आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और विपणन को निरंतर जारी रखने की अनुमति दी गई है, लेकिन श्रमिकों और लॉजिस्टिक्स की समस्या को लेकर दवा बनाने वाली कंपनियों का कारोबार प्रभावित हुआ है। दवा विनिर्माताओं ने बताया कि कच्चे माल और पैकेजिंग की सामग्री की सप्लाई की समस्या से लेकर कार्यबल की कमी के कारण कंपनियों में पूरी क्षमता के उत्पादन नहीं हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में दवा और चिकित्सा संबंधी उपकरणों का टोटा पड़ सकता है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्च र्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार मदान ने आईएएनएस से कहा, "लॉकडाउन के कारण श्रमिकों का समस्या पैदा हो गई है। कुछ लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं तो कुछ कर्मचारी जहां रहते हैं, वहां कोरंटीन होने के कारण नहीं आ पाते हैं। हालांकि फैक्टरियों में काम चल रहा है, लेकिन 40 से 50 ही श्रमिकों की उपस्थिति रह रही है।" श्रमिकों और लॉजिस्टिक्स की समस्या से सिर्फ बड़े दवा विनिर्मात ही नहीं, छोटी कंपनियां भी जूझ रही हैं। ऑल इंडिया स्मॉल स्केल फार्मास्युटिकल मैन्युफक्च र्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राकेश जैन ने आईएएनएस को बताया कि लॉकडाउन के बाद करीब 80 फीसदी फक्टरियां में उत्पादन ठप हो चुका है, जिससे आने वाले दिनों में दवाओं की किल्लत हो सकती है। सरकार द्वारा कंपनियों को छूट देने के बावजूद इस तरह की कठिनाई पैदा होने के कारण के बारे में पूछे जाने पर जैन ने बताया कि सरकार द्वारा जो नीतिगत फैसले लिए गए उसकी सूचना जब तक दी गई, तब तक श्रमिक जा चुके थे। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स की भारी समस्या है, पैकेजिंग की सामग्री नहीं होने से बनी हुई टैबलेट की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जैन ने कहा कि दवा बनाने वाले प्लांट ज्यादातर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में हैं, जहां का श्रमिकों और लॉजिस्टिक्स की बड़ी समस्या है और इससे उत्पादन पर भारी असर पड़ा है। राजस्थान फार्मास्युटिकल मैन्युफक्च र्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विनोद कलानी ने भी बताया फैक्टरियों में 35 से 40 फीसदी से ज्यादा कार्यबल नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्या के साथ-साथ कुरियर, पैकेजिंग समेत पूरी सप्लाई चेन बाधित है, जिससे कारोबार पर असर पड़ा है। देश में फार्मास्युटिकल प्रोफेशनलों के सबसे पुराने संगठन इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन प्रेसीडेंट डॉ. टी.वी. नारायण ने भी आईएएनएस को बताया कि दवा का उत्पादन प्रभावित होने से आने वाले दिनों में देश में इसकी किल्लत पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दवा कंपनियों को उत्पादन जारी रखने की अनुमति दिए जाने के बावजूद कच्चे माल की आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स व परिवहन को लेकर दिक्कतें आ रही हैं। दवा विनिर्माताओं की समस्याओं को लेकर औषधि विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि अगर दवा और चिकित्सा उपकरणों का उत्पादन दोबारा उसी प्रकार जल्द बहाल नहीं हुआ जिस प्रकार लॉकडाउन के पहले चल रहा था, तो आने वाले दिनों में देश में इसकी किल्लत हो सकती है।    साभार-khaskhabar.com

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मुम्बई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल बहुत जल्द आर्थिकपैकेज देने की बात कहने के बाद भारतीय शेयर बाजार को उम्मीदें बढ़ गई हैं। यही वजह है कि 21 दिन के लॉकडाउन ऐलान के बाद भी शुरुआती मिनटों में सेंसेक्स 400 अंक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी ने भी करीब 200 अंक की बढ़त देखी और यह 8 हजार अंक के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, कुछ देर बाद ही बाजार में गिरावट भी देखने को मिल गई। -11.40AM पर 349.57 सेंसेक्स बढा गया और 27,023.60 के बीच कारोबार कर रहा है। इसके बाद 9.50 AM पर 273.45 सेंसेक्स बढा गया और 26,400.58 के बीच कारोबार कर रहा है। आपको बताते जाए कि सोमवार को ऐतिहासिक गिरावट के बाद मंगलवार को बाजार में थोड़ी रौनक थी। तीस शेयरों वाला सेंसेक्स 692.79 अंक यानी 2.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,674.03 अंक पर बंद हुआ।कारोबार के दौरान ये 27,462.87 अंक तक गया है।  साभार-khaskhabar.com  

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शेयर बाजार आज 1400 अंकों की बढ़त के साथ खुला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 26,189.00 अंक ऊपर और निफ्टी 7848.00 पॉइंट पर कारोबार कर रहा है। कोरोना के कहर से घरेलू शेयर बाजार में मचे कोहराम के बीच सोमवार सेंसेक्स 3934 अंकों से ज्यादा टूट कर बंद हुआ था और निफ्टी भी लुढ़ककर 7610 पर बंद हुआ थी। यह सेंसेक्स के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले 13 मार्च को भी बाजार में 3389 पॉइंट की गिरावट आई थी।  साभार-khaskhabar.com

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